राजनीतिज्ञों का प्रिय शब्द विकास है, लेकिन एक विकास का इतना विकास किए की 8 पुलिसकर्मियों को शहीद होना पड़। और यही सिस्टम रहा तो एक दिन देश से लोकतंत्र का जनाजा उठ जाएगा
गाजीपुर। दुर्दांत अपराधी जिस तरह से 8 पुलिसकर्मियों को शहीद किया ।वह इस सरकार में 8 दिन भी नहीं जी पाया इससे पहले बहुत सरकारें आई लेकिन मैंने पहली बार इस सरकार में देखा कि 8 दिन में आठ दुर्दांत हिस्ट्रीशीटर अपराधियों का ढेर किया गया है ।इसी को कानून का हनन कहते हैं ।जिस नेताओं ने फोटो खिंचवाए हैं वही उसकी हत्या नहीं हुई थी तो कुछ और सवाल उठा रहे थे और बाद में जब हत्या हो गई । तो कुछ और सवाल उठा रहे हैं ।यह सरकार को ध्यान भटकाने के अलावा कुछ नहीं बहुत जल्द उन लोगों पर भी कार्रवाई होगी जो उसके साथ फोटो खिंचवाए हैं जो उसका संरक्षण दे रहे थे ।अब वह सरकार नहीं है जो एक विकास को पार्टी में शामिल कराने के लिए बाप-बेटे में महाभारत शुरू हो गया था और बाप बेटे की झगड़ा में पीस गए बेचारे चाचा जी जिस तरह से दूध से मक्खी को निकाल दिया जाता है उसी तरह चाचा जी को जमीन पर ऐसे पटके कि अपने पार्टी का ना एक विधायक और ना ही सांसद बना पाए चाचा जी रोते रहे मैंने नेताजी का कुर्ता धोती धोया मैंने पार्टी को सींचा लेकिन मुझे ही घर के के कचड़े की तरह दोनों बाप बेटे मिलकर बाहर फेंक दिए ।अब देखना है इस विधानसभा चुनाव से पहले किस विकास को शामिल करते हैं। इसमें केवल राजनीतिज्ञों का ही नहीं नौकरशाहों का भी विकास को विकास करने में बड़ा योगदान रहा है और पूरी भारत में भी यही हाल है अगर लोकतंत्र को जीवित रखना है ।तो इन नौकरशाहों राजनीतिज्ञों को भी वही हाल होना चाहिए जो विकास दुबे का हुआ है और यह नया भारत है अगर कानून की अड़चनें आती है तो उसमें भी संशोधन करके इस पर अमल करना चाहिए ।नेताओं और नौकरशाहों को बिल से बाहर निकालना है तो दुर्दांत अपराधी की पत्नी ही काफी है जैसे-जैसे रिचा दुबे से पूछताछ होगी वैसे वैसे यह बिल से बाहर निकलेंगे बहुत सारे पुलिसकर्मी भी इसको संरक्षण ,सुरक्षा दे रहे थे उन पुलिसकर्मियों को भी बिल से बाहर निकालना जरूरी है ।क्योंकि पुलिस कर्मियों को हत्या कराने में सबसे बड़ा गद्दारी इन पुलिसकर्मियों ने ही किया है घर का भेदी लंका ढाए वही हाल पुलिसकर्मियों ने किया है और यह अक्षम्य अपराध है ।इन सबों का भी वही हश्र होना चाहिए जैसे विकास दुबे का हुआ है और इसके लिए मुख्यमंत्री को दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत करना चाहिए। कौन नहीं जानता है डाकू हो या तस्कर या दुर्दांत अपराधी सब राजनीति के आंगन में अठखेलियां करते हैं।
